विगत वर्ष १५ अगस्त से कुछ दिन पहले मेरे पास एक छोटी बिटिया आई और कहने लगी की मैंने स्वंत्रता दिवस में पाठशाला में फंसी ड्रेस में हिस्सा लेना है आप मुझे बोलने के लिए कुछ लिख likh कर दो. मेने उस से पुछा तू क्या बनेगी तो उस ने चहकते हुए कहा "मैं लक्ष्मी बाई बनूंगी"! मैंने कहा ठीक है मैं लिख दूंगी पर पहले ये तो बताओ की लक्ष्मी बाई कौन थी! तो वो बोली की लक्ष्मी बाई भी फूलन देवी की तरह डाकू थी! मुझे हैरान देख कर उस ने मुझे समझाया की जिस तरह फूलन देवी मर्दों की तरह कपड़े पहन कर हाथ में बन्दूक ले कर, घोड़े पर चढ़ कर लोगों को मारती थी, उसी तरह लक्ष्मी बाई भी मर्दों के कपडे पहन कर हाथ में तलवार ले कर घोड़े पर सवार हो कर अंग्रेजों को मारती थी! वो भी क्वीन थी और फूलन भी! मैंने कहा बेटा मैं लिख तो दूंगी पर मेरे से फूलन और लक्ष्मी बाई में अंतर जरुर पूछ लेना! उस ने सहमती में सर हिलाया! फिर मैंने उसे लिख कर दिया!
"मैं मनु हूँ झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई! जिन फिरंगियों से अपने देश भारत को आज़ादी दिलाने के लिए मैंने अपने तन - मन - धन की आहुति दी वहीँ आज पश्चिमी सभ्यता के रंग में रंगे भारत के नौनिहालों को देख कर मेरा मन तार तार होता है और मैं जार जार रोटी हूँ"
भारती पाण्डेय सोलन (हिमाचल प्रदेश)