Tuesday, 4 January 2011

Lakshmi Bai and Foolan Devi

विगत वर्ष १५ अगस्त से कुछ दिन पहले मेरे पास एक छोटी बिटिया आई और कहने लगी की मैंने स्वंत्रता दिवस में पाठशाला में फंसी  ड्रेस में हिस्सा लेना है आप मुझे बोलने के लिए कुछ  लिख likh कर दो. मेने उस से पुछा तू क्या बनेगी तो उस ने चहकते हुए कहा "मैं लक्ष्मी बाई बनूंगी"! मैंने कहा  ठीक है मैं लिख दूंगी पर पहले ये तो बताओ की लक्ष्मी बाई कौन थी! तो वो बोली की लक्ष्मी बाई भी फूलन देवी की तरह डाकू थी! मुझे हैरान देख कर उस ने मुझे समझाया की जिस तरह फूलन देवी मर्दों की तरह कपड़े पहन कर हाथ में बन्दूक ले कर, घोड़े पर चढ़ कर लोगों को मारती थी, उसी तरह लक्ष्मी बाई भी मर्दों के कपडे पहन कर हाथ में तलवार ले कर घोड़े पर सवार हो कर अंग्रेजों को मारती थी! वो भी क्वीन थी और फूलन भी! मैंने कहा  बेटा मैं लिख तो दूंगी पर मेरे से फूलन और लक्ष्मी बाई में अंतर जरुर पूछ लेना! उस ने सहमती में सर हिलाया! फिर मैंने उसे लिख कर दिया!
    "मैं मनु हूँ झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई! जिन फिरंगियों से अपने देश भारत को आज़ादी दिलाने के लिए मैंने अपने तन - मन - धन की आहुति दी वहीँ आज पश्चिमी सभ्यता के रंग में रंगे भारत के नौनिहालों को देख कर मेरा मन तार तार होता है और मैं जार जार रोटी हूँ"

भारती पाण्डेय सोलन (हिमाचल प्रदेश)